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सुनन नसाई

नंबर 1827

नंबर 1827किताब 21, नंबर 10
أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ إِسْحَاقَ، قَالَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، قَالَ حَدَّثَنَا مَنْصُورُ ابْنُ صَفِيَّةَ، عَنْ أُمِّهِ، صَفِيَّةَ بِنْتِ شَيْبَةَ عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَقِّنُوا هَلْكَاكُمْ قَوْلَ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The Messenger of Allah said: 'Prompt your dying ones to say La ilaha illahllah (there is none worthy of worship except Allah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।