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सुनन नसाई

नंबर 1819

नंबर 1819किताब 21, नंबर 2
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، قَالَ حَدَّثَنَا الزُّبَيْدِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي الزُّهْرِيُّ، عَنْ أَبِي عُبَيْدٍ، مَوْلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ يَتَمَنَّيَنَّ أَحَدُكُمُ الْمَوْتَ إِمَّا مُحْسِنًا فَلَعَلَّهُ أَنْ يَعِيشَ يَزْدَادُ خَيْرًا وَهُوَ خَيْرٌ لَهُ وَإِمَّا مُسِيئًا فَلَعَلَّهُ أَنْ يَسْتَعْتِبَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Ubaid the freed slave of 'Abdur-Rahman bin Awf that he heard Abu Huraidah say:'None of you should wish for death. Either he is a doer of good, so if he lives he will do more good or he is a doer of evil but perhaps he will give up his evil ways
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।