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सुनन नसाई

नंबर 1817

नंबर 1817किताब 20, नंबर 220
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو قُتَيْبَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الشُّعَيْثِيُّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى أَرْبَعًا قَبْلَ الظُّهْرِ وَأَرْبَعًا بَعْدَهَا لَمْ تَمَسَّهُ النَّارُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ هَذَا خَطَأٌ وَالصَّوَابُ حَدِيثُ مَرْوَانَ مِنْ حَدِيثِ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ ‏.‏
It was narrated from Umm Habibah that:The Prophet (ﷺ) said: "Whoever prays four rak'ahs before Zuhr and four after, the Fire will not touch him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।