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सुनन नसाई

नंबर 1814

नंबर 1814किताब 20, नंबर 217
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ نَاصِحٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ مُوسَى، عَنْ مَكْحُولٍ، عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ قَبْلَ الظُّهْرِ وَأَرْبَعًا بَعْدَهَا حَرَّمَهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى النَّارِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Umm Habibah that:The Messenger of Allah (ﷺ) used to say: "Whoever prays four rak'ahs before Zuhr and four after, Allah, the Mighty and Sublime, will forbid him from the Fire
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।