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सुनन नसाई

नंबर 1800

नंबर 1800किताब 20, नंबर 203
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمِ بْنِ نُعَيْمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَبَّانُ، وَمُحَمَّدُ بْنُ مَكِّيٍّ، قَالاَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ أَبِي يُونُسَ الْقُشَيْرِيِّ، عَنِ ابْنِ أَبِي رَبَاحٍ، عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ، حَدَّثَهُ عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ بِنْتِ أَبِي سُفْيَانَ، قَالَتْ مَنْ صَلَّى ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً فِي يَوْمٍ فَصَلَّى قَبْلَ الظُّهْرِ بَنَى اللَّهُ لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ ‏.‏
It was narrated that Umm Habibah bint Abi Sufyan said:"Whoever prays twelve rak'ahs in a day and prays before Zuhr, Allah (SWT) will build for him a house in Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।