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सुनन नसाई

नंबर 1798

नंबर 1798किताब 20, नंबर 201
أَخْبَرَنِي أَيُّوبُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا مُعَمَّرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ حِبَّانَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى فِي يَوْمٍ ثِنْتَىْ عَشْرَةَ رَكْعَةً بَنَى اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لَهُ بَيْتًا فِي الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَطَاءٌ لَمْ يَسْمَعْهُ مِنْ عَنْبَسَةَ ‏.‏
It was narrated from 'Ata from Anbasah bin Abi Sufyan, that Umm Habibah said:"I heard the Messenger of Allah (ﷺ) say: 'Whoever prays twelve rak'ahs a day, Allah (SWT), the Mighty and Sublime, will build for him a house in Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।