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सुनन नसाई

नंबर 1793

नंबर 1793किताब 20, नंबर 196
أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عُمَرَ، قَالَ مَنْ فَاتَهُ وِرْدُهُ مِنَ اللَّيْلِ فَلْيَقْرَأْهُ فِي صَلاَةٍ قَبْلَ الظُّهْرِ فَإِنَّهَا تَعْدِلُ صَلاَةَ اللَّيْلِ ‏.‏
It was narrated that Humaid bin Abdur-Rahman said:"Whoever misses his Wird at night, let him recite it during prayer before Zuhr, and that will be equivalent to night prayers
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih MaqtuAbu Ghuddah
  • Sahih MaqtuAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।