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सुनन नसाई

नंबर 1757

नंबर 1757किताब 20, नंबर 160
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ لاَ يَدَعُ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ قَبْلَ الظُّهْرِ وَرَكْعَتَيْنِ قَبْلَ الْفَجْرِ ‏.‏ خَالَفَهُ عَامَّةُ أَصْحَابِ شُعْبَةَ مِمَّنْ رَوَى هَذَا الْحَدِيثَ فَلَمْ يَذْكُرُوا مَسْرُوقًا ‏.‏
It was narrated from Aishah that:The Prophet (ﷺ) would not omit four rak'ahs before Zuhr and two rak'ahs before Fajr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।