सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 1755

नंबर 1755किताब 20, नंबर 158
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلُ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِي عَامِرٍ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عَزْرَةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُوتِرُ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ ‏.‏
It was narrated from Sa'eed bin Abdur-Rahman bin Abza that:The Prophet (ﷺ) used to recite in witr and he quoted the same hadith
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • -Abu Ghuddah
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।