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सुनन नसाई

नंबर 1743

नंबर 1743किताब 20, नंबर 146
أَخْبَرَنَا بِشْرُ بْنُ خَالِدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شَبَابَةُ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ زُرَارَةَ بْنِ أَوْفَى، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَوْتَرَ بِـ ‏{‏ سَبِّحِ اسْمَ رَبِّكَ الأَعْلَى ‏}‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ لاَ أَعْلَمُ أَحَدًا تَابَعَ شَبَابَةَ عَلَى هَذَا الْحَدِيثِ ‏.‏ خَالَفَهُ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ ‏.‏
(With that chain) from Imran bin Husain that:The Prophet (ﷺ) recited in Witr: Glorify the Name of your Lord, the Most High
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।