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सुनन नसाई

नंबर 1739

नंबर 1739किताब 20, नंबर 142
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الصَّبَّاحِ، قَالَ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ حَبِيبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ الْقَاسِمِ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي الْوِتْرِ بِـ ‏{‏ سَبِّحِ اسْمَ رَبِّكَ الأَعْلَى ‏}‏ وَ ‏{‏ قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ ‏}‏ وَ ‏{‏ قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ‏}‏
Ata bin As-Sa'ib reported from Sa'eed bin Abdur-Rahman bin Abza from his father:That the Messenger of Allah (ﷺ) used to recite in witr: Glorify the Name of your Lord, the Most High;" and "Say: O you disbelievers!;' and 'Say: He is Allah, (the) One
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।