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सुनन नसाई

नंबर 1708

नंबर 1708किताब 20, नंबर 111
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ الْجَزَّارِ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُوتِرُ بِثَلاَثِ عَشْرَةَ رَكْعَةً فَلَمَّا كَبِرَ وَضَعُفَ أَوْتَرَ بِتِسْعٍ ‏.‏ خَالَفَهُ عُمَارَةُ بْنُ عُمَيْرٍ فَرَوَاهُ عَنْ يَحْيَى بْنِ الْجَزَّارِ عَنْ عَائِشَةَ ‏.‏
It was narrated that Umm Salamah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) used to pray witr with thirteen rak'ahs, and when he grew older and weaker he prayed witr with nine
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।