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सुनन नसाई

नंबर 1703

नंबर 1703किताब 20, नंबर 106
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّهُ كَانَ يُوتِرُ بِثَلاَثٍ بِـ ‏{‏ سَبِّحِ اسْمَ رَبِّكَ الأَعْلَى ‏}‏ وَ ‏{‏ قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ ‏}‏ وَ ‏{‏ قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ‏}‏
Zuhair narrated from Abu Ishaq, from Sa'eed bin Jubair, :Ibn Abbas used to pray witr with three (units) with (the Surahs): "Glorify the Name of Your Lord, the Most High" (Surah Al-A'la), "Say: O You disbelievers" (Surah Al-Kafirun), and "Say: He is Allah, (the) One" (Surah Al-Ikhlas)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAbu Ghuddah
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।