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सुनन नसाई

नंबर 1681

नंबर 1681किताब 20, नंबर 84
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِي حَصِينٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ وَثَّابٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ أَوْتَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ أَوَّلِهِ وَآخِرِهِ وَأَوْسَطِهِ وَانْتَهَى وَتْرُهُ إِلَى السَّحَرِ ‏.‏
It was narrated that Aishah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) prayed witr at the beginning (of the night) and at the end, and in the middle. And toward the end of his life, he settled on performing witr at the end of the night
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।