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सुनन नसाई

नंबर 1672

नंबर 1672किताब 20, नंबर 75
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُغِيرَةِ، قَالَ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ، عَنْ شُعَيْبٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ سَأَلَ رَجُلٌ مِنَ الْمُسْلِمِينَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَيْفَ صَلاَةُ اللَّيْلِ فَقَالَ ‏ "‏ صَلاَةُ اللَّيْلِ مَثْنَى مَثْنَى فَإِذَا خِفْتَ الصُّبْحَ فَأَوْتِرْ بِوَاحِدَةٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn Umar said:"A man from among the Muslims asked the Messenger of Allah (ﷺ): 'How are prayers at night to be done?' He said: 'prayers at night are (offered) two by two, then if you fear that dawn will come, pray witr with one
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।