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सुनन नसाई

नंबर 1662

नंबर 1662किताब 20, नंबर 65
أَخْبَرَنَا شُعَيْبُ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَيْسٍ، قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ كَيْفَ كَانَتْ قِرَاءَةُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِاللَّيْلِ يَجْهَرُ أَمْ يُسِرُّ قَالَتْ كُلُّ ذَلِكَ قَدْ كَانَ يَفْعَلُ رُبَّمَا جَهَرَ وَرُبَّمَا أَسَرَّ ‏.‏
It was narrated that Abdullah bin Abi Qais said:"I asked Aishah: "How did the Messenger of Allah (ﷺ) recite at night- did he recite loudly or silently?" She said: 'He used to do both; sometimes he recited loudly and sometimes he recited silently
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।