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सुनन नसाई

नंबर 1653

नंबर 1653किताब 20, नंबर 56
أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ سَلْمٍ الْبَلْخِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا النَّضْرُ، قَالَ أَنْبَأَنَا يُونُسُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ مَا قُبِضَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَتَّى كَانَ أَكْثَرُ صَلاَتِهِ جَالِسًا إِلاَّ الْمَكْتُوبَةَ ‏.‏ خَالَفَهُ شُعْبَةُ وَسُفْيَانُ وَقَالاَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ ‏.‏
It was narrated from Al-Aswad, that Umm Salamah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) did not pass away until most of his prayers were offered sitting down, except for the obligatory prayers
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · The Book of Qiyam Al-Lail (The Night Prayer) and Voluntary Prayers During the Day

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।