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सुनन नसाई

नंबर 1589

नंबर 1589किताब 19, नंबर 34
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْحَكَمِ، عَنْ شُعَيْبٍ، عَنِ اللَّيْثِ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ فَرْقَدٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَذْبَحُ أَوْ يَنْحَرُ بِالْمُصَلَّى ‏.‏
It was narrated from Nafi that:Abdullah (bin Umar) told him that the Messenger of Allah (ﷺ) used to offer sacrifice in the prayer place
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book of the Prayer for the Two 'Eids

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।