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सुनन नसाई

नंबर 1571

नंबर 1571किताब 19, नंबर 16
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ أَيُّوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ السَّائِبِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم صَلَّى الْعِيدَ قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَحَبَّ أَنْ يَنْصَرِفَ فَلْيَنْصَرِفْ وَمَنْ أَحَبَّ أَنْ يُقِيمَ لِلْخُطْبَةِ فَلْيُقِمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Abdullah bin As-SA'ib that:The Prophet (ﷺ) offered the 'Eid prayer and said: 'Whoever would like to leave, let him leave, and whoever would like to stay for the Khutbah, let him stay
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book of the Prayer for the Two 'Eids

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।