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सुनन नसाई

नंबर 1557

नंबर 1557किताब 19, नंबर 2
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ، عَنْ أَبِي عُمَيْرِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ عُمُومَةٍ، لَهُ أَنَّ قَوْمًا، رَأَوُا الْهِلاَلَ فَأَتَوُا النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَأَمَرَهُمْ أَنْ يُفْطِرُوا بَعْدَ مَا ارْتَفَعَ النَّهَارُ وَأَنْ يَخْرُجُوا إِلَى الْعِيدِ مِنَ الْغَدِ ‏.‏
It was narrated from 'Umair bin Anas from his paternal uncles, that :Some people saw the crescent moon and came to the Prophet (ﷺ), and he told them to break their fast after the sun has risen and to go out for 'Eid the (morning of the) following day
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book of the Prayer for the Two 'Eids

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।