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सुनन नसाई

नंबर 1555

नंबर 1555किताब 18, नंबर 27
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الأَشْعَثُ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ صَلَّى صَلاَةَ الْخَوْفِ بِالَّذِينَ خَلْفَهُ رَكْعَتَيْنِ وَالَّذِينَ جَاءُوا بَعْدُ رَكْعَتَيْنِ فَكَانَتْ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ وَلِهَؤُلاَءِ رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated from Abu Bakrah that:The Prophet (ﷺ) offered the fear prayer with those who were behind him, praying two rak'ahs (with them) and two rak'ahs with those who came after them, so the Prophet (ﷺ) prayed four rak'ahs and the others each prayed two rak'ahs
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · The Book of the Fear Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।