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सुनन नसाई

नंबर 1526

नंबर 1526किताब 17, नंबर 23
أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْجَبَّارِ بْنُ الْعَلاَءِ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ عَتَّابِ بْنِ حُنَيْنٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَوْ أَمْسَكَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ الْمَطَرَ عَنْ عِبَادِهِ خَمْسَ سِنِينَ ثُمَّ أَرْسَلَهُ لأَصْبَحَتْ طَائِفَةٌ مِنَ النَّاسِ كَافِرِينَ يَقُولُونَ سُقِينَا بِنَوْءِ الْمِجْدَحِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Sa'eed Al-Khudri said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'If Allah (SWT) were to withhold rain from His slaves for five years and then send it, some of the people would become disbelievers, saying: "We have been given rain by the star of Al-Mijdah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · The Book of Praying for Rain (Al-Istisqa')

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।