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सुनन नसाई

नंबर 1489

नंबर 1489किताब 16, नंबर 31
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ حَكِيمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، عَنِ الْحَسَنِ بْنِ صَالِحٍ، عَنْ عَاصِمٍ الأَحْوَلِ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَلَّى حِينَ انْكَسَفَتِ الشَّمْسُ مِثْلَ صَلاَتِنَا يَرْكَعُ وَيَسْجُدُ ‏.‏
It was narrated from An-Nu'man bin Bashir that:The Messenger of Allah (ﷺ) prayed when there was an eclipse of the sun like our prayer, bowing and prostrating
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Eclipses

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।