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सुनन नसाई

नंबर 1459

नंबर 1459किताब 16, नंबर 1
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏‏ "‏‏ إِنَّ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللَّهِ تَعَالَى لاَ يَنْكَسِفَانِ لِمَوْتِ أَحَدٍ وَلاَ لِحَيَاتِهِ وَلَكِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يُخَوِّفُ بِهِمَا عِبَادَهُ ‏‏"‏‏ ‏‏.‏‏
It was narrated that Abu Bakrah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'The sun and moon are two signs of Allah (SWT), the Most High, and they do not become eclipsed for death or birth of anyone, rather Allah (SWT), the Mighty and Sublime, strikes fear into His slaves through them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 16 · The Book of Eclipses

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।