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सुनन नसाई

नंबर 1436

नंबर 1436किताब 15, नंबर 4
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ عَوْنٍ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كُنَّا نَسِيرُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَيْنَ مَكَّةَ وَالْمَدِينَةِ لاَ نَخَافُ إِلاَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ نُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"We used to travel with the Messenger of Allah (ﷺ) between Makkah and Al-Madinah, fearing nothing but Allah, the Mighty and Sublime, and praying two rak'ahs
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Book of Shortening the Prayer When Traveling

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।