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सुनन नसाई

नंबर 1431

नंबर 1431किताब 14, नंबर 68
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، قَالَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ خَالِدٍ، عَنْ رَبَاحٍ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ حَدَّثَنِي سَعِيدٌ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ فِي الْجُمُعَةِ سَاعَةً لاَ يُوَافِقُهَا عَبْدٌ مُسْلِمٌ يَسْأَلُ اللَّهَ فِيهَا شَيْئًا إِلاَّ أَعْطَاهُ إِيَّاهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that:The Messenger of Allah (ﷺ) said: "On Friday, there is an hour when, if a Muslim slave asks Allah for something at that time, He will give it to him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।