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सुनन नसाई

नंबर 1429

नंबर 1429किताब 14, नंबर 66
أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ يَزِيدَ، - وَهُوَ ابْنُ هَارُونَ - قَالَ أَنْبَأَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّهُ كَانَ يُصَلِّي بَعْدَ الْجُمُعَةِ رَكْعَتَيْنِ يُطِيلُ فِيهِمَا وَيَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَفْعَلُهُ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that he used to pray two rak'ahs after Jumu'ah, making them lengthy, and he said:"The Messenger of Allah (ﷺ) used to do this
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAbu Ghuddah
  • ShadhAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।