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सुनन नसाई

नंबर 1415

नंबर 1415किताब 14, नंबर 52
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ جَالَسْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَمَا رَأَيْتُهُ يَخْطُبُ إِلاَّ قَائِمًا وَيَجْلِسُ ثُمَّ يَقُومُ فَيَخْطُبُ الْخُطْبَةَ الآخِرَةَ ‏.‏
It was narrated that Jabir bin Samurah said:"I sat with the Prophet (ﷺ) and I did not see him deliver the khutbah except standing, and he sat, then he stood up and delivered the second khutbah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।