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सुनन नसाई

नंबर 1400

नंबर 1400किताब 14, नंबर 37
أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْحَسَنِ، وَيُوسُفُ بْنُ سَعِيدٍ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - قَالاَ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ جَاءَ رَجُلٌ وَالنَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلَى الْمِنْبَرِ يَوْمَ الْجُمُعَةِ فَقَالَ لَهُ ‏"‏ أَرَكَعْتَ رَكْعَتَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَارْكَعْ ‏"‏ ‏.‏
Amr bin Dinar narrated that:He heard Jabir bin 'Abdullah say: "A man came when the Prophet (ﷺ) was on the minbar on a Friday. He said to him: 'Have you prayed two rak'ahs?' He said: 'No.' He said: 'Pray
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।