أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنِ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ، قَالَ كَانَ بِلاَلٌ يُؤَذِّنُ إِذَا جَلَسَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى الْمِنْبَرِ يَوْمَ الْجُمُعَةِ فَإِذَا نَزَلَ أَقَامَ ثُمَّ كَانَ كَذَلِكَ فِي زَمَنِ أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ رضى الله عنهما .
It was narrated that As-Sa'ib bin Yazid said:"Bilal used to call the Adhan when the Messenger of Allah (ﷺ) sat on the Minbar on Friday, and when he came down he would say the Iqamah. It continued like that during the time of Abu Bakr and 'Umar, may Allah (SWT) be pleased with them
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।