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सुनन नसाई

नंबर 1371

नंबर 1371किताब 14, नंबर 7
أَخْبَرَنِي مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، قَالَ حَدَّثَنِي الْمُفَضَّلُ بْنُ فَضَالَةَ، عَنْ عَيَّاشِ بْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ الأَشَجِّ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ حَفْصَةَ، زَوْجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ رَوَاحُ الْجُمُعَةِ وَاجِبٌ عَلَى كُلِّ مُحْتَلِمٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Hafsah, the wife of the Prophet (ﷺ) that:The Prophet (ﷺ) said: "Going to Jumu'ah is obligatory for everyone who has reached the age of puberty
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book of Jumu'ah (Friday Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।