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सुनन नसाई

नंबर 1182

नंबर 1182किताब 13, नंबर 4
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى الصَّنْعَانِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ، قَالَ سَمِعْتُ عُبَيْدَ اللَّهِ، - وَهُوَ ابْنُ عُمَرَ - عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ كَانَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ إِذَا دَخَلَ فِي الصَّلاَةِ وَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَرْكَعَ وَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنَ الرُّكُوعِ وَإِذَا قَامَ مِنَ الرَّكْعَتَيْنِ يَرْفَعُ يَدَيْهِ كَذَلِكَ حَذْوَ الْمَنْكِبَيْنِ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that :The Prophet (ﷺ) used to raise his hands when he began to pray, when he wanted to bow, when he raised his head from bowing, and when he stood up after the first two rak'ahs, he would raise his hands likewise, level with his shoulders
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book of Forgetfulness (In Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।