सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 1178

नंबर 1178किताब 12, नंबर 150
أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ، سُلَيْمَانُ بْنُ سَيْفٍ قَالَ حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الأَعْرَجِ، عَنِ ابْنِ بُحَيْنَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم صَلَّى فَقَامَ فِي الرَّكْعَتَيْنِ فَسَبَّحُوا فَمَضَى فَلَمَّا فَرَغَ مِنْ صَلاَتِهِ سَجَدَ سَجْدَتَيْنِ ثُمَّ سَلَّمَ ‏.‏
It was narrated from Ibn Buhainah that:The Prophet (ﷺ) prayed and stood up following the first two rak'ahs, and they said (SubhanAllah). He carried on, then when he finished his prayer he performed two prostrations, then he said the Salam
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।