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सुनन नसाई

नंबर 1176

नंबर 1176किताब 12, नंबर 148
أَخْبَرَنَا الْهَيْثَمُ بْنُ أَيُّوبَ الطَّالْقَانِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي الرَّكْعَتَيْنِ كَأَنَّهُ عَلَى الرَّضْفِ ‏.‏ قُلْتُ حَتَّى يَقُومَ قَالَ ذَلِكَ يُرِيدُ ‏.‏
It was narrated that 'Abdullah bin Mas'ud said:"In the first two rak'ahs the Prophet (ﷺ) was as if he were on stones heated by fire
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।