सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 1161

नंबर 1161किताब 12, नंबर 133
أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ يَحْيَى السِّجْزِيُّ، - يُعْرَفُ بِخَيَّاطِ السُّنَّةِ نَزَلَ بِدِمَشْقَ أَحَدُ الثِّقَاتِ - قَالَ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عِيسَى قَالَ أَنْبَأَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ قَالَ حَدَّثَنَا مَخْرَمَةُ بْنُ بُكَيْرٍ قَالَ أَنْبَأَنَا عَامِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا جَلَسَ فِي الثِّنْتَيْنِ أَوْ فِي الأَرْبَعِ يَضَعُ يَدَيْهِ عَلَى رُكْبَتَيْهِ ثُمَّ أَشَارَ بِأُصْبُعِهِ ‏.‏
Amr bin 'Abdullah bin Az-Zubair narrated that:His father said: "When the Messenger of Allah (ﷺ) sat in the second or fourth rak'ah, he would place his hands on his knees and point with his finger
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।