सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 1158

नंबर 1158किताब 12, नंबर 130
أَخْبَرَنَا الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ بْنِ دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ بَكْرِ بْنِ مُضَرَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ يَحْيَى، أَنَّ الْقَاسِمَ، حَدَّثَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ - عَنْ أَبِيهِ، قَالَ مِنْ سُنَّةِ الصَّلاَةِ أَنْ تَنْصِبَ، الْقَدَمَ الْيُمْنَى وَاسْتِقْبَالُهُ بِأَصَابِعِهَا الْقِبْلَةَ وَالْجُلُوسُ عَلَى الْيُسْرَى ‏.‏
It was narrated from Al-Qasim who narrated from 'Abdullah-he is Ibn Abdullah bin 'Umar- that:His father (Ibn 'Umar) said: "One of the sunnahs of the prayer is to hold the right foot upright and point its toes toward the Qiblah, and to sit on the left foot
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।