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सुनन नसाई

नंबर 1144

नंबर 1144किताब 12, नंबर 116
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا افْتَتَحَ الصَّلاَةَ كَبَّرَ وَرَفَعَ يَدَيْهِ وَإِذَا رَكَعَ وَبَعْدَ الرُّكُوعِ وَلاَ يَرْفَعُ بَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated from Salim that his father said:"When the Prophet (ﷺ) started to pray he said the takbir and raised his hands, and when he bowed, and after bowing, but he did not raise them between the two prostrations
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।