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सुनन नसाई

नंबर 1137

नंबर 1137किताब 12, नंबर 109
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ عَمْرٍو، - يَعْنِي ابْنَ الْحَارِثِ - عَنْ عُمَارَةَ بْنِ غَزِيَّةَ، عَنْ سُمَىٍّ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَقْرَبُ مَا يَكُونُ الْعَبْدُ مِنْ رَبِّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَهُوَ سَاجِدٌ فَأَكْثِرُوا الدُّعَاءَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that:The Messenger of Allah (ﷺ) said: "The closest that a person can be to his Lord, the Mighty and Sublime, is when he is prostrating, so increase in supplication then
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।