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सुनन नसाई

नंबर 1111

नंबर 1111किताब 12, नंबर 83
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ الْمَرْوَزِيُّ، قَالَ أَنْبَأَنَا عِيسَى، - وَهُوَ ابْنُ يُونُسَ - عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ عُمَارَةَ، عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ، عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تُجْزِئُ صَلاَةٌ لاَ يُقِيمُ الرَّجُلُ فِيهَا صُلْبَهُ فِي الرُّكُوعِ وَالسُّجُودِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Mas'ud said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'No prayer is valid in which a man does not maintain his back (at ease) when bowing and prostrating
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।