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सुनन नसाई

नंबर 1084

नंबर 1084किताब 12, नंबर 56
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ أَبِي بِشْرٍ، قَالَ سَمِعْتُ يُوسُفَ، - وَهُوَ ابْنُ مَاهِكٍ - يُحَدِّثُ عَنْ حَكِيمٍ، قَالَ بَايَعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ لاَ أَخِرَّ إِلاَّ قَائِمًا ‏.‏
It was narrated that Abu Bushr said:"I heard Yusuf-meaning Ibn Mahak- narrating that Hakim said: 'I gave my pledge of allegiance to the Messenger of Allah (ﷺ), pledging that I would go down (in prostration) only after standing up from bowing
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।