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सुनन नसाई

नंबर 1081

नंबर 1081किताब 12, नंबर 53
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبَّادٌ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كُنَّا نُصَلِّي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الظُّهْرَ فَآخُذُ قَبْضَةً مِنْ حَصًى فِي كَفِّي أُبَرِّدُهُ ثُمَّ أُحَوِّلُهُ فِي كَفِّي الآخَرِ فَإِذَا سَجَدْتُ وَضَعْتُهُ لِجَبْهَتِي ‏.‏
It was narrated that Jabir bin 'Abdullah said:"We used to pray Zuhr with the Messenger of Allah (ﷺ) and I would take a handful of pebbles in my hand to cool them down, then I would pass them from one hand to the other, and when I prostrated I would put them down to lay my forehead on them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAbu Ghuddah
  • HasanAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।