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सुनन नसाई

नंबर 1076

नंबर 1076किताब 12, नंबर 48
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ سُفْيَانَ، وَشُعْبَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، ح وَأَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ شُعْبَةَ، وَسُفْيَانَ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُرَّةَ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنِ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْنُتُ فِي الصُّبْحِ وَالْمَغْرِبِ ‏.‏ وَقَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
It was narrated from Al-Bara' bin 'Azib that:The Prophet (ﷺ) used to say the Qunut in Subh and Maghrib. (One of the narrators) 'Ubaidullah said: "Allah's Messenger (ﷺ) used to
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।