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सुनन नसाई

नंबर 1058

नंबर 1058किताब 12, नंबर 30
أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ الْمَرْوَزِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ كُلَيْبٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّهُ قَالَ أَلاَ أُصَلِّي بِكُمْ صَلاَةَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَصَلَّى فَلَمْ يَرْفَعْ يَدَيْهِ إِلاَّ مَرَّةً وَاحِدَةً ‏.‏
It was narrated from Abdullah that he said:"Shall I not show you how the Messenger of Allah (ﷺ) prayed?" So he prayed, and he only raised his hands once
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।