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सुनन नसाई

नंबर 1056

नंबर 1056किताब 12, नंबर 28
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - وَهُوَ ابْنُ زُرَيْعٍ - قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ نَصْرِ بْنِ عَاصِمٍ، أَنَّهُ حَدَّثَهُمْ عَنْ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ، أَنَّهُ رَأَى رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَرْفَعُ يَدَيْهِ إِذَا رَكَعَ وَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنَ الرُّكُوعِ حَتَّى يُحَاذِيَ بِهِمَا فُرُوعَ أُذُنَيْهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Malik bin Al-Huwairith that:He saw the Prophet (ﷺ) raise his hands when he bowed, and when he raised his head from bowing, until they were in level with the highest part of his ears
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · The Book of The At-Tatbiq (Clasping One's Hands Together)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।