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सुनन नसाई

नंबर 999

नंबर 999किताब 11, नंबर 124
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ الْحَسَنِ بْنِ شَقِيقٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ، أَنْبَأَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ وَاقِدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي صَلاَةِ الْعِشَاءِ الآخِرَةِ بِالشَّمْسِ وَضُحَاهَا وَأَشْبَاهِهَا مِنَ السُّوَرِ ‏.‏
It was narrated from Abdullah bin Buraidah, from his father, that:The Messenger of Allah (ﷺ) used to recite 'By the sun and its brightness' and similar surahs in Isha
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of the Commencement of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।