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सुनन नसाई

नंबर 992

नंबर 992किताब 11, नंबर 117
أَخْبَرَنَا الْفَضْلُ بْنُ سَهْلٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو الْجَوَّابِ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ رُزَيْقٍ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ إِبْرَاهِيِمَ بْنِ مُهَاجِرٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ رَمَقْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عِشْرِينَ مَرَّةً يَقْرَأُ فِي الرَّكْعَتَيْنِ بَعْدَ الْمَغْرِبِ وَفِي الرَّكْعَتَيْنِ قَبْلَ الْفَجْرِ ‏{‏ قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ ‏}‏ وَ ‏{‏ قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ‏}‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn Umar said:"I watched the Messenger of Allah (ﷺ)- twenty times- reciting in the two rak'ahs after maghrib 'Say: O you disbelievers' and 'Say: He is Allah, (the) One
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAbu Ghuddah
  • HasanAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of the Commencement of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।