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सुनन नसाई

नंबर 983

नंबर 983किताब 11, नंबर 108
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْحَارِثِ، عَنِ الضَّحَّاكِ بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَشَجِّ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ مَا صَلَّيْتُ وَرَاءَ أَحَدٍ أَشْبَهَ صَلاَةً بِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ فُلاَنٍ ‏.‏ فَصَلَّيْنَا وَرَاءَ ذَلِكَ الإِنْسَانِ وَكَانَ يُطِيلُ الأُولَيَيْنِ مِنَ الظُّهْرِ وَيُخَفِّفُ فِي الأُخْرَيَيْنِ وَيُخَفِّفُ فِي الْعَصْرِ وَيَقْرَأُ فِي الْمَغْرِبِ بِقِصَارِ الْمُفَصَّلِ وَيَقْرَأُ فِي الْعِشَاءِ بِالشَّمْسِ وَضُحَاهَا وَأَشْبَاهِهَا وَيَقْرَأُ فِي الصُّبْحِ بِسُورَتَيْنِ طَوِيلَتَيْنِ ‏.‏
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने अमुक व्यक्ति के मुकाबले में किसी के भी पीछे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक मिलती-जुलती नमाज़ नहीं पढ़ी। चुनांचे हमने उस व्यक्ति के पीछे नमाज़ पढ़ी और पाया कि वह ज़ुहर की प्रथम दो रकातों को लंबा करते थे तथा अंतिम दो रकातों को हल्का करते थे, तथा अस्र की नमाज़ हल्की पढ़ते थे, और मग़रिब में 'क़िसार-ए-मुफ़स्सल' (सूरा अल-हुजुरात से लेकर सूरा अन-नास तक की सूरतें) और इशा में (والشمس وضحاها) और उसकी जैसी सूरतें पढ़ा करते थे, एवं सुबह की नमाज़ की दोनों रकातों में लंबी सूरतें पढ़ा करते थे।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 11 · The Book of the Commencement of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।