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सुनन नसाई

नंबर 899

नंबर 899किताब 11, नंबर 24
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ فَضَالَةَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ أَنْبَأَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَلِيٍّ، عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا افْتَتَحَ الصَّلاَةَ قَالَ ‏ "‏ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ تَبَارَكَ اسْمُكَ وَتَعَالَى جَدُّكَ وَلاَ إِلَهَ غَيْرُكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Sa'eed that:When the Prophet (ﷺ) started to pray he would say: "Subhanakallahumma, wa bihamdika tabarakasmuka wa ta'ala jadduka wa la ilaha ghairuk (Glory and praise be to You, O Allah. Blessed be Your name and exalted be Your majesty, there is none worthy of worship except You)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book of the Commencement of the Prayer

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।