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सुनन नसाई

नंबर 869

नंबर 869किताब 10, नंबर 93
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ سَمِعْتُ أَنَسًا، - رضى الله عنه - قَالَ أَتَانَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي بَيْتِنَا فَصَلَّيْتُ أَنَا وَيَتِيمٌ لَنَا خَلْفَهُ وَصَلَّتْ أُمُّ سُلَيْمٍ خَلْفَنَا ‏.‏
Anas said:"The Messenger of Allah (ﷺ) came to our house and I prayed with an orphan of ours behind him, and Umm Sulaim prayed behind us
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book of Leading the Prayer (Al-Imamah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।