أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ، عَنِ ابْنِ بُحَيْنَةَ، قَالَ أُقِيمَتْ صَلاَةُ الصُّبْحِ فَرَأَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَجُلاً يُصَلِّي وَالْمُؤَذِّنُ يُقِيمُ فَقَالَ " أَتُصَلِّي الصُّبْحَ أَرْبَعًا " .
It was narrated that Ibn Buhainah said:"The Iqamah for Subh prayer was said, and the Messenger of Allah (ﷺ) saw a man praying while the Mu'adhdhin saying the Iqamah. He said: 'Are you praying Subh with four Rak'ahs?
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।